Friday, 2 December 2011

नामुमकिन तो कुछ भी नहीं



जो करना है उसे ठान के देखो, नामुमकिन तो कुछ भी नहीं.
की है पहल तो अंत तक चलना,
लाख रोके ज़माना तुम मत डरना,
लोग बोलेंगे भी, सुनाएँगे भी मनाएँगे भी,
अपनी तरफ से लाख कोशिश करेंगे और तुम्हे समझायेंगे भी.
अपनी धुन पर अड़ जाओ जो तुम तो, फासला हो जितना भी ,
अपना लक्ष देखते रहना, फिर उसतक पहुच ही जाओगे नामुमकिन तो कुछ भी नहीं.

जिस रोज लगे की डगमगाए तुम, क्या हुआ अगर लडखडाये तुम,
गिरेंगे फिर उठेंगे फिर गिरेंगे तो , चलना सीख ही जायेंगे,
नज़र हो बस मंजिल की तरफ तो वहां तक पहुच ही जायेंगे.
कोशिश करने वालो की कभी हर नहीं होती, एक दिन जीत का जशन भी मनाएंगे नामुमकिन तो कुछ भी नहीं.

बस मन हो केन्द्रित, और हो सकारात्मक विचार
फिर चाहे नकारात्मकता करे लाख प्रहार,
हिला नहीं पायेगी अपने संकल्प से तुम्हे,
डटे रहना अपनी राहों में, वो ही तुम्हे मंजिल तक ले जाएँगी.
झूम जाओ कामयाबी के नशे में और दो सभ्को यही सलाह की नामुमकिन तो कुछ भी नहीं.